

🔥 “सहारनपुर नगर निगम बना खुद ‘अतिक्रमण का गढ़’, बाहर चला रहा है सफाई अभियान! — जब खुद के दफ्तर में पार्किंग से लेकर रास्तों तक कब्ज़ा, तो दूसरों पर कार्रवाई क्यों?”
सहारनपुर।✅
शहर को अतिक्रमणमुक्त बनाने के नाम पर नगर निगम सहारनपुर की टीमें इन दिनों पूरे जोश में हैं। सड़कों, बाजारों, गलियों और चौक-चौराहों पर निगम की प्रवर्तन टीमें दिन-रात कार्रवाई कर रही हैं। ठेलेवालों से लेकर छोटे दुकानदारों तक पर नगर निगम की गाज गिर रही है। दुकानों के आगे रखा सामान हटाया जा रहा है, फुटपाथ पर रखे ठेले और गाड़ियां जब्त की जा रही हैं, जिससे व्यापारियों में नाराजगी और भय का माहौल है। लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल उभरकर सामने आया है — जब खुद नगर निगम का अपना मुख्यालय अतिक्रमण की जकड़ में है, तो फिर दूसरों पर कार्रवाई का औचित्य क्या है?
नगर निगम परिसर में चारपहिया और दुपहिया वाहनों की बेतरतीब पार्किंग, गलियारों में रखे टेबल-कुर्सी और अघोषित दुकानों जैसी स्थिति देखकर यही लगता है कि निगम को सुधार की शुरुआत अपने घर से करनी चाहिए। नगर निगम के अंदर का हाल यह है कि कर्मचारी अपनी गाड़ियों को इस तरह खड़ा करते हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कई जगहों पर फाइलें, मलबा और कबाड़ रखे हुए हैं, जिससे साफ-सफाई और व्यवस्था का नामोनिशान तक नहीं बचा है।
दूसरी ओर, नगर निगम अधिकारी दावा कर रहे हैं कि शहर को सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए अभियान लगातार जारी है। मगर सवाल यह उठता है कि “जब खुद निगम कार्यालय ही अतिक्रमण का अड्डा बन गया है, तो बाहर सख्ती किस नैतिकता से?” शहर के व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि नगर निगम पहले अपने कार्यालय को आदर्श बनाकर दिखाए, तभी जनता को भी उसमें ईमानदारी दिखेगी।
शहर के प्रमुख व्यापारी संघों ने निगम की इस “दोहरे मापदंड वाली नीति” पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि निगम अधिकारियों को पहले अपने परिसरों में व्यवस्था लागू करनी चाहिए। “जब खुद का दफ्तर अतिक्रमण मुक्त नहीं, तब छोटे दुकानदारों से ईमानदारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
निगम के अभियान पर सवाल उठाते हुए कई नागरिकों ने कहा कि यह कार्रवाई केवल दिखावे की है, ताकि मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकें। “अगर नगर निगम वाकई शहर की सूरत बदलना चाहता है, तो सबसे पहले उसे अपने कार्यालय को ‘मॉडल कॉम्प्लेक्स’ बनाना चाहिए,” स्थानीय व्यापारी नेता ने कहा।
इस पूरी स्थिति ने नगर निगम की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। नगर निगम का दायित्व केवल जनता पर दबाव डालना नहीं, बल्कि खुद को अनुकरणीय उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करना भी है। यदि निगम अपने कार्यालय से अतिक्रमण हटाकर साफ-सुथरा और अनुशासित वातावरण बना दे, तो निश्चित रूप से शहर के व्यापारी और आमजन भी सहयोग के लिए आगे आएंगे।
लेकिन जब नगर निगम स्वयं अपने दफ्तर की सीमाओं में व्यवस्था नहीं ला पा रहा, तब सड़क पर आम दुकानदारों पर डंडा चलाना केवल “शक्ति प्रदर्शन” और “दिखावा” कहा जा सकता है।
इस पूरे मामले पर नागरिक समाज ने नगर आयुक्त से मांग की है कि निगम मुख्यालय को पहले चरण में अतिक्रमणमुक्त घोषित किया जाए और अंदर की अव्यवस्था को दूर करने के लिए विशेष टीम गठित की जाए। तभी शहर में चल रहा यह तथाकथित “अतिक्रमण मुक्त अभियान” वाकई सार्थक साबित होगा।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह,









